गौरैया रानी — मधु तिवारी

गौरैया रानी तेरी चीं-चीं मैं सुनना चाहती हूंभूल हुई क्या हम सबसे उसे गुनना चाहती हूंरुठकर जो चली गई तुम दरो – दीवार सेफिर से ताना बाना वो बुनना चाहती हूंघोसला बनाओ छज्जे पर तिनके बिखरा दोएक एक तिनके को मैं चुनना चाहती हूंकरो माफ हमें सजा इतनी कठोर न दोतेरे उजड़े घरौंदे को मैं तुनना चाहती हूंआओ हमें न सताओ छोड़ो न अकेले भीतेरे साथ का आनंद फिर महसूसना चाहती हूंमधु तिवारी

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