तुझे पाने की ख़ातिर – अजय कुमार मल्लाह

तुझे खोकर अरमां दफन करना नहीं आया, तेरी खातिर सब रिश्तों से बगावत कर ली।सितारों की भीड़ मे था चाँद को चुना मैंने, पूरे वादे कर दिए और रफ़ाक़त कर ली।जिनकी औक़ात मेरे जज़्बात समझने की ना थी, उन रिवायत के नुमाइंदों से भी अदावत कर ली।था इरादा नहीं किसी का भी दिल दुखाऊँ मैं, तुझे पाने की चाह में थोड़ी सियासत कर ली।बाहों में बसर तेरी, हो मेरा मेरी “करुणा”, सोचकर रब की मर्जी ये हिमाक़त कर ली।

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

8 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 20/03/2017
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 20/03/2017
  3. Kajalsoni 20/03/2017
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 23/03/2017

Leave a Reply