‘मेरी बेटी’ – कविकृशिव

मेरी  बेटी  मुझसे  है  कहती,   काश  मैं  एक  तितली  होतीरंग  बिरंगे  पंखो  के  संग,    मैं  भी   घर  से  निकली  होतीफूलो  पर  इठलाती  इतराती,   पत्तो  पर  से  फिसली  होतीखुले  गगन  में  साँसे  लेती ,   यूँ  आजादी  को  न  मचली    होतीकैसे  उसको  मैं  समझाऊ ,   इस  दुनिया  की  रीत  सिखाऊंदोहरे   पैमानों  की  धरातल  पर,   कैसे  आजादी  की   सैर  कराऊँजितने  उजले  ये  चेहरे-मुखोटे,   काश  मति  भी  उतनी  उजली  होतीहर  बेटी  फिर  तितली  सी  होती,   हर  नारी  होती श्रद्धा  की  ज्योति….

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

22 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 20/03/2017
    • KaviKrishiv KaviKrishiv 20/03/2017
    • KaviKrishiv KaviKrishiv 20/03/2017
  2. Madhu tiwari Madhu tiwari 20/03/2017
    • KaviKrishiv KaviKrishiv 20/03/2017
  3. Rakesh Pandey 20/03/2017
    • KaviKrishiv KaviKrishiv 20/03/2017
    • KaviKrishiv KaviKrishiv 20/03/2017
  4. C.M. Sharma babucm 20/03/2017
    • KaviKrishiv KaviKrishiv 20/03/2017
  5. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 20/03/2017
    • KaviKrishiv KaviKrishiv 20/03/2017
  6. KaviKrishiv KaviKrishiv 20/03/2017
  7. Kajalsoni 20/03/2017
    • KaviKrishiv KaviKrishiv 20/03/2017
  8. Neetu 20/03/2017
    • KaviKrishiv KaviKrishiv 20/03/2017
  9. Geet 20/03/2017
    • KaviKrishiv KaviKrishiv 20/03/2017
  10. Sachin Verma 20/03/2017
    • KaviKrishiv KaviKrishiv 20/03/2017

Leave a Reply