यूँ ही नहीं स्वप्न देखता हूँ मैं..

यूँ ही नहीं स्वप्न देखता हूँ मैं, सच कहूँ तो ये आइना हैं-उन तानों बानों का जिनकाजुड़ाव है मेरे जज्बातों से,इरादों से और उन्मादों से |सराबोर हूँ मैं कुछ इस कदरस्वयं बढ़ रहे हैं कदम,औचक हो रहा है आभाषजैसे आने वाले क्षण अपनी झोली में समेटे हैंउमंगों के बेपनाह तरंग |यूँ ही नहीं स्वप्न देखता हूँ मैं,सच कहूँ तो ये आइना हैं-उन पहलुओं का जिनका है नाताजीवन के विभिन्न फलसफों से,उम्मीद से जीवन्त अालिंगनों से ||सप्रेम, राकेश पांडेय

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16 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 18/03/2017
    • राकेश पांडेय 18/03/2017
  2. C.M. Sharma babucm 18/03/2017
    • राकेश पांडेय 18/03/2017
  3. mani mani 18/03/2017
    • राकेश पांडेय 18/03/2017
  4. Madhu tiwari Madhu tiwari 18/03/2017
    • Rakesh Pandey 18/03/2017
  5. डॉ. विवेक डॉ. विवेक 19/03/2017
    • राकेश पांडेय 19/03/2017
  6. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 19/03/2017
    • राकेश पांडेय 19/03/2017
  7. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 19/03/2017
    • Rakesh Pandey 19/03/2017
  8. Kajalsoni 20/03/2017
    • Rakesh Pandey 20/03/2017

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