दुनिया होगी तेरे साथ – अजय कुमार मल्लाह

ये सिलसिले सितम के तुझपर कम नहीं होंगे, कल दुनिया होगी तेरे साथ पर हम नहीं होंगे।इन राहों पे चल रही है तो तु तन्हा ही चलेगी, ये राहें तेरे जाने कितने रिश्तों को निगलेगी,तेरे कदमों के संग चलते मेरे कदम नहीं होंगे, कल दुनिया होगी तेरे साथ पर हम नहीं होंगे।कई ठोकरें, कई मुश्किलें, तेरा रास्ता रोकेंगी, सच देख ना पाए तु, धूल आँखों में झोकेंगी, लगाने को तेरे ज़ख्मों पे मरहम नहीं होंगे, कल दुनिया होगी तेरे साथ पर हम नहीं होंगे। तु समझी नहीं जज़्बात ना मैं ये बात भूलूंगा,हाथों से छूटे हैं तेरे हाथ ना ये लम्हात भूलूंगा, बीच तेरे-मेरे अब मोहब्बत के भरम नहीं होंगे, कल दुनिया होगी तेरे साथ पर हम नहीं होंगे।

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12 Comments

  1. Madhu tiwari 18/03/2017
  2. डी. के. निवातिया 18/03/2017
  3. mani 18/03/2017
  4. babucm 18/03/2017
  5. Shishir "Madhukar" 19/03/2017
  6. Kajalsoni 20/03/2017

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