संत खेले होली मधुवन में

संत खेले होली सघन वन मेंअकेले वन में, मधुवन मेंआज मची है धूम रंगों कीलगे उत्सव ये रंगों काइस सघन वन में,मधुवन में

वे बसते है चैतन्य गुफा मेंवे रम जाते है अपने मेंवे धारण करते है अनन्त गुणों कोरामायो वन में एक ध्यानआतम राम काइस सघन वन में,मधुवन में

त्यागा सब घर बारत्यागे तुमने सब राग-द्वेषपिघला अहंकार और क्रोधभागे वैर-विरोध हृदय सेपलायन हुए सब वैरी कर्मसरल होगया मन का व्यवहाररम गए तुम आत्म स्वरुप मेंइस सघन वन में,मधुवन में

वे रमावे शाश्वत की धुनीवे रम जावे शाश्वत के आनंद मेंये शाश्वत का धाम है अनूठाये शाश्वत का रस है अनूठाइस रस में वे रम जावेलौ जलाई चिंतन की ज्वलंतइस आतम तत्व मेंइस सघन वन में,मधुवन में

टल जाती है चार गतिके अनन्त पीड़ाजब ध्याय आत्मस्वरूप कोबंद हो जाये पुण्य-पापचैतन्य गुफा में जब आयचहिये पूर्ण दशा इस चेतन कोवे रम जाए इस अति आनंद मेंऐसी निर्मल भावना भाईइस सघन वन में,मधुवन में

में वंदन करता हु बार बारउनके चरणों मेंभावना भाते है हम भी ऐसीपार लगाये इस भव सेइस सघन वन में,मधुवन में

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14 Comments

  1. डॉ. विवेक डॉ. विवेक 18/03/2017
    • sumit jain sumit jain 18/03/2017
  2. C.M. Sharma babucm 18/03/2017
  3. Madhu tiwari Madhu tiwari 18/03/2017
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 18/03/2017
  5. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 19/03/2017
    • sumit jain sumit jain 19/03/2017
  6. Kajalsoni 20/03/2017
    • sumit jain sumit jain 21/03/2017

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