बदलते रिश्ते

चिमनी से उठता हुआ धुंआ,
कर रहा है बयान,
किसी के घर की दास्ताँ…

कहीं कुछ जल रहा है,बुझा दो |
दो दिल राख न बन जाएँ…
चल रहे हैं इस तेज़ी से,
बेदर्द हवाओं के झोंके,
बदल न दे चिनगारियों को शोलों में,
रोको, दो जान सुलग न जाएँ…

तिनका-तिनका बना था जो आशियाना,
दिल के दरों और अरमानों की दीवारों से,
दरारों के बीच कहीं खो न जाए,
देखो, कहीं ढेर हो न जाए…
दो दिल राख न बन जाएँ…
दो जान सुलग न जाएँ…

चिमनी से उठता हुआ धुंआ,
कर रहा है बयान,
किसी के घर की दास्ताँ…

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8 Comments

  1. Madhu tiwari 17/03/2017
  2. babucm 17/03/2017
    • Garima Mishra 03/02/2021
  3. Shishir "Madhukar" 18/03/2017
    • Garima Mishra 03/02/2021
  4. Kajalsoni 19/03/2017
    • Garima Mishra 03/02/2021

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