जो रिश्ते थे बनाए……………राकेश राठी

जो रिश्ते थे बनाए, वो टूट गये क्यूँ हाये। बेगाने तो बेगाने,अपने भी हुए पराये।धरती तो क्या, आसमान भी देख घबराये। जो रिश्ते थे बनाए, वो टूट गये क्यूँ हाये।जो ख्वाब थे सजाए, वो टूट गये क्यूँ हाये। जो कल तक थे अपने,वो आज हुए क्यूँ पराये।जो रिश्ते थे बनाए, वो टूट गये क्यूँ हाये। जिंदगी तो क्या, मौत भी देख घबराये।जो रिश्ते थे बनाए, वो टूट गये क्यूँ हाये। देख इस जग की सुंदरता, आसमान में तारे झिलमिलाऐ।धरती मां की सुंदरता देख,आसमान भी शरमाये। जो रिश्ते थे बनाए, वो टूट गये क्यूँ हाये।किया था साथ देने का वादा,वो आज दामन क्यूँ छुङाये। जो रिश्ते थे बनाए, वो टूट गये क्यूँ हाये।———-राकेश राठी———[email protected]

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8 Comments

  1. hitishere 17/03/2017
  2. डी. के. निवातिया 17/03/2017
  3. डॉ. विवेक 17/03/2017
  4. Madhu tiwari 17/03/2017
  5. babucm 17/03/2017
  6. Shishir "Madhukar" 18/03/2017
  7. sumit jain 18/03/2017
  8. Kajalsoni 19/03/2017

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