आज का नवयुवक — डी. के. निवतिया

अजीब हाल में दिखता आज का नवयुवकजागा हुआ है, मगर कुछ खोया खोया साहँसता हुआ दिखता, पर कुछ रोया-रोया साजीवन संघर्ष की दौड़ में, जा रहा किस डगरअफ़सोस ! नही इस बात की खुद को भी खबर !!

चलता जाता है, सुनसान सा, अनजान साअज्ञान सा,  बेजान सा, सुस्त बेजुबान साखो गया मंजिल जैसे, हुआ जाता पथ भ्रष्ट भीउलझा हुआ जीवन चक्र में, उठाता है कष्ट भी !!

ओझल हुआ उत्थान की इस चकाचौंध मेंसिमट कर रह गया मोबाइल की ओट मेंखो रहा है पल-२, हर पल पहचान अपनीसिमट कर पाश्चात्य संस्कृति की होड़ में !!

सम्भलो मेरे नौजवानो, के वक्त अभी शेष हैदुनिया में अपना कौशल दिखाना अभी शेष हैघर से लेकर देश तक संभालना अभी शेष हैकरो पथ प्रदर्शित, के गर्व से चलना अभी बाकी है !!

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—-ःः डी. के. निवतिया ःः———

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14 Comments

    • डी. के. निवातिया 21/03/2017
  1. babucm 18/03/2017
    • डी. के. निवातिया 21/03/2017
  2. Meena Bhardwaj 18/03/2017
    • डी. के. निवातिया 21/03/2017
  3. Shishir "Madhukar" 19/03/2017
    • डी. के. निवातिया 21/03/2017
  4. ANU MAHESHWARI 19/03/2017
    • डी. के. निवातिया 21/03/2017
  5. mani 19/03/2017
    • डी. के. निवातिया 21/03/2017
  6. Kajalsoni 20/03/2017
    • डी. के. निवातिया 21/03/2017

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