तुझे मेरी याद आएगी – अजय कुमार मल्लाह

जब रिश्तों की खूबसूरती तेरे लिए बदल जाएगी,जब भीड़ में खड़ी अकेली तु पछताएगी,तब यक़ीनन मेरी जान, तुझे मेरी याद आएगी।आँसुओं की सेज पर तु बैठकर रो रही होगी,जब बर्बाद तेरी ज़िंदगी हर लम्हा हो रही होगी,तेरी सुनने वाला कोई नहीं, तो ये सब किसे सुनाएगी,तब यक़ीनन मेरी जान, तुझे मेरी याद आएगी।फिर हाथों में गुलाब कोई देने वाला नही होगा,तेरे आँसुओं का हिसाब तुझसे लेने वाला नही होगा,हर निवाले मे ज़हर, तेरी ये ज़िद तुझे खिलाएगी,तब यक़ीनन मेरी जान, तुझे मेरी याद आएगी।तब मै भी नशे में जिऊँगा तेरी याद मे नही,शाम मयखाने में गुज़रेगी खुदा से फरियाद मे नही,बेहोशी मे तुझे भुला दूँगा, तु मुझे कैसे भुलाएगी,तब यक़ीनन मेरी जान, तुझे मेरी याद आएगी।मै चाहूँगा किसी मोड़ पर रब तुझसे ना मिलाए,तु गलत है इसका एहसास हर रोज तुझे दिलाए,हर तरफ से बेचैनी, “अजय” की यादों में सुकून पाएगी,तब यक़ीनन मेरी जान, तुझे मेरी याद आएगी।

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10 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 17/03/2017
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 17/03/2017
  3. डॉ. विवेक डॉ. विवेक 17/03/2017
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 18/03/2017
  5. Kajalsoni 19/03/2017

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