जगाने आया हूँ — डी के निवातिया

न कोई हंगामा न कोई बवाल करने आया हूँबिगड़े हुए हालातो से आगाह करने आया हूँसोये हुए है आजादी के दीवाने कई बरसो सेगहरी नींद से फिर उनको जगाने आया हूँ !!!जागो देश के वीरो, हिन्द को बताने आया हूँनिष्ठुर पड़े ह्रदय से मैं जमीर जगाने आया हूँकही जकड़े न जाओ अपनों की ही जंजीरो मेंघर के ही गद्दारो से मैं तुमको बचाने आया हूँ !!!बदल रही है तस्वीर तुम्हारी, देश बदल रहा हैजलती शमां की बाहों में परवाना मचल रहा हैमुमकिन है फना हो जाये हम भी और तुम भीपरिवर्तन के दौर में जीने का चलन बदल रहा है !!!नये दौर की नई कहानी तुमको बतलाने आया हूँतुम ही हो कर्णधार नवयुग के समझाने आया हूँबहक न जाना सपनो में धरातल दिखाने आया हूँतुमको आज तुम्हारी ताकत से मिलाने आया हूँ !!!रफ़्तार बहुत है दुनिया की पहचान कराने आया हूँसंभल के उठाना कदम, गिंरने से बचाने आया हूँउड़ना सीखो आकाशो में आखेटक से बचके रहनाकर न ले कोई शिकार नजरो को दिखाने आया हूँ !!!!!डी के निवातिया

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18 Comments

  1. Madhu tiwari 17/03/2017
    • डी. के. निवातिया 20/03/2017
  2. Meena Bhardwaj 17/03/2017
    • डी. के. निवातिया 20/03/2017
  3. डॉ. विवेक 17/03/2017
    • डी. के. निवातिया 20/03/2017
    • डी. के. निवातिया 20/03/2017
  4. babucm 17/03/2017
    • डी. के. निवातिया 20/03/2017
  5. Shishir "Madhukar" 18/03/2017
    • डी. के. निवातिया 20/03/2017
  6. sumit jain 18/03/2017
    • डी. के. निवातिया 20/03/2017
  7. Kajalsoni 19/03/2017
    • डी. के. निवातिया 20/03/2017
  8. mani 19/03/2017
    • डी. के. निवातिया 20/03/2017

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