आशा की प्रदीप

आशा की प्रदीप—————— १ अंधकार की आँचल छोड़कर मैं सूर्यदेव की ओर बढूँगा दुःख और पराजय की पथ पर प्रदीप बहुत सारा जलाऊँगा। २ बुझती ख्वाहिश की डगर पर आशा की प्रदीप जलेगा कुछ अपनों से कुछ दूसरों से जलेगा। ३ मन में सुख और शांति की सुनहरी अट्टालिका स्मरण कर सामने की कष्ट दूर फ़ेंक कर आशा की डगर पर आगे बढ़ना होगा। ———-चंद्र मोहन किस्कु

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3 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 16/03/2017
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 16/03/2017
  3. Madhu tiwari Madhu tiwari 16/03/2017

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