ये तुम नहीं समझोगी – अजय कुमार मल्लाह

वो क्या जानेंगे जो पा लेते हैं,जानते तो वो हैं जो खो देते हैं।ये तुम नहीं समझोगी तुमने खोया ही क्या है,जो चाहा था तुम्हारे दिल ने तुम्हे मिल ही गया है,मुझ जैसे पागल आशिक़ बैठकर तन्हाई मे रो लेते हैं।वो क्या जानेंगे जो पा लेते हैं,जानते तो वो हैं जो खो देते हैं।बेवफा हो अगर ये कहूँ तो कुछ गलत नहीं कहूंगा,तुम्हारी ये बेरूखी होकर तन्हा मै आख़िर कब तक सहूंगा,कसमों वादों की कद्र भूलकर गैरों की बाहों में सो लेते हैं।वो क्या जानेंगे जो पा लेते हैं,जानते तो वो हैं जो खो देते हैं।कसम से मेरी आँखों ने न तेरे जिस्म को देखा,कि कैसी रंगत क्या निखार है तेरी कैसी रूप रेखा,मेरे जज़्बात ना समझी तु,इसलिए तेरी यादों से दरकिनार हो लेते हैं।वो क्या जानेंगे जो पा लेते हैं,जानते तो वो हैं जो खो देते हैं।

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8 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 14/03/2017
  2. डी. के. निवातिया 14/03/2017
  3. Madhu tiwari 14/03/2017
  4. babucm 14/03/2017

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