जले होलिका नफरत की …(डॉ. विवेक कुमार)

अबकी बार इस होली में चले प्रेम की पिचकारी,राधा के गहरे रंग से रंग दें दुनिया सारी। जले होलिका नफरत की मिटे आपस की दूरी,वृन्दावन हो मन सबका छलके खुशियों की गगरी। फागुन के मधुर गीतों से थिरके जन-मन की नगरी,बढ़े मान व शान देश काहसरते हों सबकी पूरी।आपसबों को होली की हार्दिक शुभकामनाएँ!तेली पाड़ा मार्ग, दुमका-814 101(c) सर्वाधिकार सुरक्षित।

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27 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 13/03/2017
  2. कृष्ण सैनी 13/03/2017
  3. Kajalsoni 13/03/2017
  4. sumit jain 13/03/2017
  5. Madhu tiwari 13/03/2017
  6. Awadhesh 13/03/2017
  7. Awadhesh 13/03/2017
  8. poonamshree 13/03/2017
  9. poonamshree 13/03/2017
  10. डॉ. विवेक 13/03/2017
  11. डॉ. विवेक 13/03/2017
  12. डॉ. विवेक 13/03/2017
  13. डॉ. विवेक 13/03/2017
  14. डॉ. विवेक 13/03/2017
  15. डॉ. विवेक 13/03/2017
  16. डॉ. विवेक 13/03/2017
  17. डॉ. विवेक 13/03/2017
  18. babucm 13/03/2017
  19. डॉ. विवेक 13/03/2017
  20. डी. के. निवातिया 14/03/2017
  21. डॉ. विवेक 14/03/2017
  22. Meena Bhardwaj 16/03/2017
  23. डॉ. विवेक 16/03/2017
  24. vikram 18/03/2017
  25. vikram 18/03/2017
  26. डॉ. विवेक 21/03/2017

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