मुझसे झूठा प्यार. . . अजय कुमार मल्लाह

तु समझती रही मजाक हर जज़्बात को मेरे,मै आख़िर क्यूँ नहीं समझा इन इरादों को तेरे,यूँ दूरियाँ बरक़रार, रखने का शुक्रिया,मुझसे झूठा प्यार, करने का शुक्रिया……..तेरी ज़ुल्फ जो बिखरी सँवारना चाहा,दिल के दरिया में तुझे उतारना चाहा,धड़कन में मेरे बढ़ी तब रफ्तार,जब तुझे मैंने दिल से पुकारना चाहा,झूठ ही सही ज़माने से, डरने का शुक्रिया,मुझसे झूठा प्यार, करने का शुक्रिया……..किसपे ईनायत और किससे शिकायत करूँ,किसके लिए जिऊँ बेमौत मैं मरूँ,काश कि ये सब झूठ हो जाए,ताकि तुझपे फिर से ऐतबार मैं करूँ,झूठ ही सही जुदाई में, मरने का शुक्रिया,मुझसे झूठा प्यार, करने का शुक्रिया……..

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20 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 13/03/2017
  2. डॉ. विवेक डॉ. विवेक 13/03/2017
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 13/03/2017
  4. Krishan saini कृष्ण सैनी 13/03/2017
  5. Kajalsoni 13/03/2017
  6. sumit jain sumit jain 13/03/2017
  7. C.M. Sharma babucm 13/03/2017
  8. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 14/03/2017
  9. ajay sen 17/03/2017

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