ज़िन्दगानी गुजरती है – शिशिर मधुकर

हुई ना प्रेम की बारिश मेरा मन आँगन सूखा है मिलन की आस संजोए हरदम रहता ये भूखा है दीवारें देख कर मैंने मकां एक घर समझ डालाइसके भीतर हर शख्स मगर आदत से रूखा हैसितारे रोज़ चलते हैं मगर बदले नहीं फिर भी उन्हें क्या फर्क पड़ता है ये मन कितना दुखा हैमेरी बातों को सुन के लोग भी दीवाना बोलेंगे पर जानेंगे ना वो स्वाद अगर फल ना चूखा हैज़िन्दगानी गुजरती है मधुकर रफ्तार को रोकोउसे ना चैन आएगा मेरा घर जिसने भी फूंका हैशिशिर मधुकर

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12 Comments

    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 12/03/2017
  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 12/03/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 12/03/2017
  2. डॉ. विवेक डॉ. विवेक 12/03/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 12/03/2017
  3. Krishan saini कृष्ण सैनी 12/03/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 12/03/2017
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 12/03/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 12/03/2017
  5. Kajalsoni 13/03/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 13/03/2017

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