मन

पल-पल ,हर पल ,प्रति पल कल-कल,बहता है जल ,चंचल मन चल, नवकल की तु ,हलचल कर चल ,चल सकल जगत, जल की भांति,निश्छल बन चल ;हर राह उमंग, मन बन चन्दन ,तु वन-उपवन -कानन -जंगल पावन कर चल।चल नभ-जल -थल, अचल मे तु ,कलरव कर चल ,ये तल-भूतल,अविचल-अविरल,मन बन निर्मल,कर -कर प्रणाम सबको तु चल;हे प्रकाण्ड गगन,तु मस्त- मगन,नक्षत्र नवल,हर ग्रह विमल ,तु बन तारा,गिर -गिर पर चल।चल भोर तलक,कर निशा दमन,मन हठ कर तु ,क्षण -क्षण में चल ,ब्रम्हाण सकल तु उलट -पलट ,मन प्रण कर तु ,कण -कण में चल ;चल बढ़ मन तु ,हर रंग विहंग ,नो रस में तु ,रम -रम कर चल।ये सत्य -असत्य ,हे खेल जगत ,बन ठन कर तु ,कुश्ती में चल ,ये प्रेम लगन ,मंमता मंथन ,सब भव बंधन ,तु कर खंडन ,अंतर को चल ;चल अंत-अनंत,अखंड-अमर ,तर अटल -पटल पर चल ,मन रोम -रोम कर रूद्र सकल ,निर्भय हो तु,प्रलय तक चल,निर्भय हो तु,प्रलय तक चल…..-प्रांजल जोशी

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10 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 12/03/2017
    • Pranjal Joshi 12/03/2017
  2. Madhu tiwari Madhu tiwari 12/03/2017
    • Pranjal Joshi 12/03/2017
  3. Krishan saini कृष्ण सैनी 12/03/2017
    • Pranjal Joshi 12/03/2017
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 12/03/2017
  5. Pranjal Joshi 12/03/2017
  6. Kajalsoni 13/03/2017
    • Pranjal Joshi 16/03/2017

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