कब तक रोऊँगी मैं – अजय कुमार मल्लाह

ज़िन्दगी का ये सफर तेरे बिन भी गुज़र जाएगा,कब तक रोऊँगी मैं, और कब तक तु याद आएगा।किसी दिन भड़केगी दिल में आग,सब जल के खाक हो जाएगा,कब तक रोऊँगी मैं, और कब तक तु याद आएगा।तुझे लगता क्यूं ऐसा है तेरे पैसों पे मरती हूँ,अरे दिल साफ है मेरा मैं तुझसे प्यार करती हूँ,बहुत देर हो चुकी होगी, जब तुझे ये समझ आएगा,कब तक रोऊँगी मैं, और कब तक तु याद आएगा।हया की बंदिशें तोड़ूँ तो तु मानेगा मोहब्बत,नहीं है मुझे तुझ जैसे आशिक़ की ज़रूरत,आज निकलेगा दिल से तु, सिर्फ आँखों को रुलाएगा,कब तक रोऊँगी मैं, और कब तक तु याद आएगा।हर रस्म मोहब्बत की अदा कर दी है मैंने,जहाँ रहे तु खुश रहे दुआ कर दी है मैंने,होगी तकलीफ अब दिल को, हर लम्हा बहुत सताएगा,कब तक रोऊँगी मैं, और कब तक तु याद आएगा।

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16 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 11/03/2017
  2. Rajeev Gupta Rajeev Gupta 11/03/2017
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 11/03/2017
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 11/03/2017
  5. Kajalsoni 11/03/2017
  6. Krishan saini कृष्ण सैनी 11/03/2017
    • Krishan saini कृष्ण सैनी 12/03/2017
  7. C.M. Sharma babucm 11/03/2017

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