आ जा चित्तवन के चकोर

स्वर्णिम यौवन का सागर-अपारटकरा रहा तन से बारंबारविपुल स्नेह से सींचित् ज्वाररसमय अह्लादित करता पुकार अन्तःस्थल में उठता हिलोर आ जा ! चित्तवन के चकोर !सुरभित- सावन मधुमास बिताफाल्गुन का हर उत्पात फीकाअंतरत्तम में हिय रिस चुकाअवचेतन, मन रिक्त सब अभिलेखा है पतझड़ कब का मचाता शोर आ जा चित्तवन के चकोर !हिय मधुरस घोले अन्वेषण मेंहो अवचेतन डोले अवशोषण मेंरस – सिक्त ह्रदय खोले , मधुमय पोषण मेंअहा ! निरवता में बोले कैसा रोषण में विस्मित यौवन व्यथित हर छोर आ जा चित्तवन के चकोर !है सुख रही अधरों की मीठासजीवन – पथ में सरस बहारों की आससदृश स्वप्न अवलंबित सुख की तलाशमेघ आच्छादित पलकों की बुझति चिर प्यास बरसे अधरामृत , पी , बढता चल यौवन की ओर आ जा चित्तवन के चकोर !मन चंचल चित्तवन में डोलेझीना यौवन मधुरस घोलेघिरा अंतस् में प्यासा बोलेकिससे मधुरम् प्रतिबिंब खोले ! हिय डूब रहा रस में विभोर आ जा चित्तवन के चकोर !प्रणय निवेदन है तुमसेनव – तुषार के बिंदु बने होयौवन – प्रवाह में सतत् – उन्मत्तज्यों विकल – वेदना मध्य सने हो उफनाति लहरें व्यथित हर छोर आ जा चित्तवन के चकोर !© कवि पं आलोक पान्डेय

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14 Comments

  1. आलोक पाण्डेय आलोक पान्डेय 10/03/2017
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 10/03/2017
    • आलोक पाण्डेय आलोक पान्डेय 10/03/2017
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 10/03/2017
    • आलोक पाण्डेय आलोक पान्डेय 10/03/2017
  4. sumit jain sumit jain 10/03/2017
    • आलोक पाण्डेय आलोक पान्डेय 10/03/2017
  5. Madhu tiwari Madhu tiwari 10/03/2017
    • आलोक पाण्डेय आलोक पान्डेय 10/03/2017
  6. आलोक पाण्डेय आलोक पान्डेय 10/03/2017
  7. C.M. Sharma babucm 10/03/2017
    • आलोक पाण्डेय आलोक पान्डेय 10/03/2017
  8. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 10/03/2017
    • आलोक पाण्डेय आलोक पान्डेय 10/03/2017

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