“ख़ुशी”:-विजय

पड़े हैं कदम आँगन में जबसे तेरे
सबकी “ख़ुशी” बन गई हो तुम
बदनसीब थे जो इस घर में
उनका नसीब बन गई हो तुम

जनक नहीं हूँ मैं तेरा
पर मेरी जानकी बन गई हो तुम
माँगते है जो हर कोई खुदा से
मेरी वो दुआ बन गई हो तुम

मोल नहीं जिसका जीवन में
वो अनमोल रत्न बन गई हो तुम
किस्सों में जो अबतक सुना था
मेरी वो परी बन गई हो तुम

जीवन में जो है मुस्कान हमारे
कारण उसका बस हो तुम
हर मन की बस यही है आशा
यूँ ही “ख़ुशी” बिखरते रहना तुम

10 Comments

  1. ANU MAHESHWARI 26/03/2017
    • vijaykr811 27/03/2017
  2. Madhu tiwari 27/03/2017
    • vijaykr811 27/03/2017
  3. डी. के. निवातिया 27/03/2017
    • vijaykr811 27/03/2017
  4. Shishir "Madhukar" 27/03/2017
    • vijaykr811 27/03/2017
  5. Kajalsoni 28/03/2017
    • vijaykr811 29/03/2017

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