दिवाना………उसका:-विजय

आज व्हाट’स एप का जमाना है
फिर भी ये दिल उन खतो का दिवाना है
खत में होती थी हर बाते
कभी खुशखबरी और कभी शिकायते

आज फेसबुक का जमाना है
फिर भी ये दिल उन फोटो का दिवाना है
जिसमे होते थे भीड़ कई चेहरों के
उसमे ढूँढे जाते चेहरे अपनों के

आज यू-टूब का जमाना है
फिर भी ये दिल वी.सी.आर का दिवाना है
पैसे इक्टठे होते थे तब
रातो को जागा करते थे सब

आज स्मार्ट-फोन का जमाना है
फिर भी ये दिल लैंड-लाइन का दिवाना है
होती थी जब ट्रिंग-ट्रिंग की आवाजे
दौड़ा करते थे सब फोन उठाने

आज डिजिटल वाच का जमाना है
फिर भी ये दिल एच.एम.टी का दिवाना है
कलाई में क्या खूब था जचता
और रोज चाबी उसको था पड़ता

14 Comments

  1. ANU MAHESHWARI 27/03/2017
    • vijaykr811 27/03/2017
  2. Madhu tiwari 27/03/2017
    • vijaykr811 27/03/2017
  3. Meena Bhardwaj 27/03/2017
    • vijaykr811 27/03/2017
  4. Rosy Kumar 27/03/2017
    • vijaykr811 27/03/2017
  5. babucm 27/03/2017
    • vijaykr811 29/03/2017
  6. डी. के. निवातिया 28/03/2017
    • vijaykr811 29/03/2017
  7. Kajalsoni 28/03/2017
    • vijaykr811 29/03/2017

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