चली जिन्दगी अपने रस्ते – शिशिर मधुकर

साथ मिला होता जो मुझ को तेरी इन दो बाहों का नूर कभी न मिटने देता मैं भी इन पाक निगाहों कामौका था तब मैंने भी दिल का बस व्यापार किया हाल बताऊँ अब मैं किसको इन सूनी सी राहों काचली जिन्दगी अपने रस्ते सब इच्छाएं ना पूर्ण हुईसपना मगर नहीं टूटा है अब तक तेरी पनाहों का सारे जग को मैं अपना हँसता चेहरा दिखलाता हूँ काश कोई समझे दुःख मेरी ठंडी ठंडी आहों का कभी कभी बैरागी हो मन मुझको ये समझाता है भरा नहीं करता है आँचल इस जीवन में चाहों काशिशिर मधुकर

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16 Comments

  1. Meena Bhardwaj 08/03/2017
    • Shishir "Madhukar" 08/03/2017
  2. डी. के. निवातिया 08/03/2017
    • Shishir "Madhukar" 08/03/2017
    • Shishir "Madhukar" 08/03/2017
  3. Madhu tiwari 08/03/2017
    • Shishir "Madhukar" 08/03/2017
  4. ANU MAHESHWARI 08/03/2017
    • Shishir "Madhukar" 08/03/2017
  5. Kajalsoni 08/03/2017
    • Shishir "Madhukar" 08/03/2017
  6. कृष्ण सैनी 08/03/2017
    • Shishir "Madhukar" 08/03/2017
  7. babucm 08/03/2017
    • Shishir "Madhukar" 08/03/2017

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