गम…एक साथी:-विजय

जमाने भर की खुशियों ने, रुसवा किया है मुझे
गमो का ही साथ है,जिसने सम्भाल रखा है मुझे

पल-दो-पल के लिए मेरी जिन्दगी में ख़ुशी थी आई
मुझे न जाने क्या-क्या वो सपने थी दिखाई

मै भी कितना नादान था,इस बात से अंजान था
जो थी बेवफा की मूरत ,उसी का मै गुलाम था

कर गई मुझसे वो बेवफाई,आँखों में मेरे आंसू भर आई
फिर गम को मुझपे तरस आया,उसने मुझसे दिल लगाया

मैंने न कभी चाहा उसे,पर उसने हर पल मेरा साथ निभाया
खुदा ने जब मुझे बनाया होगा,गम को मेरा हमसफ़र बनाया होगा

तभी जब रहू मै लोगो की महफिल में,या तन्हा अकेला
गम ने मेरा हाथ न छोड़ा,चाहे कोई भी हो बेला

घोर अँधेरी बस्ती में जब साया भी मेरा मेरे साथ न था
उस अँधेरी बस्ती में भी एक गम ही मेरे साथ में था

अब गम को मान चुका हु अपना,ख़ुशी हमसे प्यार करे हो गया है ये सपना
अब गम ही मेरा हमदम है,जो ये भी छोड़ जाये,तो मुझको किस बात का गम है

10 Comments

  1. डी. के. निवातिया 24/03/2017
    • vijaykr811 24/03/2017
  2. babucm 24/03/2017
    • vijaykr811 26/03/2017
  3. Kajalsoni 24/03/2017
    • vijaykr811 26/03/2017
  4. Shishir "Madhukar" 24/03/2017
    • vijaykr811 26/03/2017
  5. Madhu tiwari 24/03/2017
    • vijaykr811 26/03/2017

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