मै दीवाना, मै मस्ताना – अजय कुमार मल्लाह

ख़्वाब में थामा हाथ तेरा तो बना हकीक़त मे दीवाना,जानबूझकर रोग लगाया दर्द मिला मुझको अनजाना, पहर दोपहर ठहर के देखा किस पल तेरा आना जाना,तेरे प्यार में रमता जोगी, मै दीवाना, मै मस्ताना।रहे दूर आँखों से नींदें शुरू हुआ अश्कों का आना,जग से इन्हे छुपाऊँ कैसे सुझे ना अब कोई बहाना,समझ के भी तु ना समझे बहुत ही मुश्किल है समझाना,तेरे प्यार में रमता जोगी, मै दीवाना, मै मस्ताना।आज की बात नहीं करता हूँ वचन मेरा है बहुत पुराना,मिलने को आतुर था तुझसे ढूँढ रहा था तेरा ठिकाना,वहीं तलाशा वहीं था खोजा जहाँ कि था तु मुझे मिला ना,तेरे प्यार में रमता जोगी, मै दीवाना, मै मस्ताना।अल्फाज़ों में बयां ना होगा जो भी कुछ है तुझे बताना,मुझको आती पलकों की भाषा बिन बोले ही समझ तु जाना,मान भी जा ओ प्रियतमा छोड़ भी दे अब मुझे सताना,तेरे प्यार में रमता जोगी, मै दीवाना, मै मस्ताना।

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10 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 08/03/2017
  2. Madhu tiwari Madhu tiwari 08/03/2017
  3. Kajalsoni 08/03/2017
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 08/03/2017
  5. Krishan saini कृष्ण सैनी 08/03/2017

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