मै तेरी तस्वीर से – अजय कुमार मल्लाह

मुमकिन है सारी बातें भी तु सुनकर चुप रहेगी,आज सिर्फ मैं कहूँगा और तु सबकुछ सुनेगी,बहुत पहले निकल के तु जा चुकी मेरी तक़दीर से,दिल के अरमां बताऊंगा मै तेरी तस्वीर से. . . .हकीक़त तो यही है मुझे भुला चुकी है तु,पर क्या जानती है कितना मुझे रुला चुकी है तु,बहुत सी शिकायतें हैं इस रांझे को हीर से,दिल के अरमां बताऊंगा मै तेरी तस्वीर से. . . .तेरी फिक्र में जीता हूँ मौत की तलाश है,मुझे तेरे जिस्म की नहीं तेरी चाहत की प्यास है,तुने मेरा नाम मिटाया क्यूं हाथों की लकीर से,दिल के अरमां बताऊंगा मै तेरी तस्वीर से. . . .मै बेहतर तेरी ख़ामोशी का राज़ समझता हूँ,कि है ख़ता मैंने है तु नाराज़ समझता हूँ,अभी तक नहीं निकला मै मोहब्बत की पीर से,दिल के अरमां बताऊंगा मै तेरी तस्वीर से. . . .

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14 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 07/03/2017
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 07/03/2017
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 07/03/2017
  4. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 07/03/2017
  5. mani mani 08/03/2017
  6. C.M. Sharma babucm 08/03/2017
  7. Krishan saini कृष्ण सैनी 08/03/2017

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