प्यार……… कृष्ण सैनी

ना हो शब्दो से बयाँ येना ही कोई परिभाषा हर किसी के मन मे हैदिलेस्पर्श की अभिलाषाकाम है इसकादो रूहो को जोड़नाआसाँ नही इसेइक बार मिलाके तोडनाप्यार,इक भाव हैकडी धूप मे छाव हैप्यार,इक तपस्या हैजिसमे सारी खुशिया हैप्यार,इक समर्पण हैजिसमे सब कुछ अर्पण हैना जाती धर्म का रंग हैकेवल प्रिया का संग हैप्यार,भरोसा और लगाव हैअलगाव मे बडा घाव हैना हो शब्दो से बयाँ येना ही कोई परिभाषाहर किसी के मन मे हैदिलेस्पर्श की अभिलाषा….कृष्ण सैनी

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21 Comments

    • कृष्ण सैनी 07/03/2017
  1. Shishir "Madhukar" 07/03/2017
    • कृष्ण सैनी 07/03/2017
  2. Madhu tiwari 07/03/2017
  3. कृष्ण सैनी 07/03/2017
  4. Kajalsoni 07/03/2017
  5. कृष्ण सैनी 07/03/2017
  6. Kajalsoni 07/03/2017
  7. डी. के. निवातिया 07/03/2017
    • कृष्ण सैनी 07/03/2017
  8. Meena Bhardwaj 07/03/2017
  9. कृष्ण सैनी 07/03/2017
  10. babucm 07/03/2017
  11. krishan saini 08/03/2017
  12. Goutam katariya 08/03/2017
  13. कृष्ण सैनी 08/03/2017
  14. Goutam katariya 08/03/2017
  15. कृष्ण सैनी 08/03/2017
  16. Goutam katariya 09/03/2017
  17. कृष्ण सैनी 09/03/2017

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