vah buhaar rahi thhi

वह बुहार रही थी ——————–वह बुहार रही थी छटका। वह बुहार रही थी दुःख और कष्टों को एक-एक कर छटका में पड़ी गन्दगी के जैसा। वह इकट्ठा कर रही थी जो उसकी बेटे ने कही थी आज सुबह ही मरो उसे स्मरण हो आया आपने बेटे की बचपन बुहारते हुए। वह इकट्ठा कर रही थी अपनी आँखों से निकल रही दुःख और कष्ट की बूँद -बूँद आँसू। ——————————–छटका =घर का बाहर वाला आँगन। यह एक संताली शब्द है। ——चंद्र मोहन किस्कु

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9 Comments

  1. Madhu tiwari 06/03/2017
    • chandramohan kisku 08/03/2017
  2. Madhu tiwari 06/03/2017
  3. Kajalsoni 07/03/2017
    • chandramohan kisku 08/03/2017
  4. कृष्ण सैनी 07/03/2017
    • chandramohan kisku 08/03/2017
  5. babucm 07/03/2017
    • chandramohan kisku 08/03/2017

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