तेरी सोहबत – शिशिर मधुकर

मेरी नज़रों ने ही तुमको एक हसी मूरत बनाया हैदेख के मेरी मुहब्बत ख्याल अब सबको आया हैतुम्हारा हाथ जब पकड़ा तन्हाई मन में हावी थीतेरे ख्वाबों में मैंने खुशीयों का ईक घर बसाया हैकोई परवाह ना की पत्थर ज़माने ने सदा समझा मैंने परखी ज्यों ही कीमत तुम्हें मुझसे छुपाया हैतेरी सोहबत ना मिले तो मुझे अब कोई ग़म नहीं मैं तो ये जानता हूँ तू मेरे बहुत नजदीक आया हैवक्त्त की मर्जी के आगे सभी बेबस हुए मधुकर यही सब सोच कर मैंने भी अपना सर झुकाया है शिशिर मधुकर

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12 Comments

  1. Madhu tiwari 05/03/2017
    • Shishir "Madhukar" 05/03/2017
  2. Kajalsoni 05/03/2017
    • Shishir "Madhukar" 05/03/2017
  3. Meena Bhardwaj 05/03/2017
    • Shishir "Madhukar" 05/03/2017
  4. ANU MAHESHWARI 05/03/2017
    • Shishir "Madhukar" 05/03/2017
  5. विजय कुमार 06/03/2017
    • Shishir "Madhukar" 06/03/2017
  6. babucm 06/03/2017
    • Shishir "Madhukar" 07/03/2017

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