नई खुशी की आशा- शिशिर मधुकर

तेरा मुझको मालूम नहीं मैं अपने दिल की कहता हूँचोट लगीं जो अपनों से उनकी सब पीड़ाए सहता हूँ वो ही दुनियाँ है जीवन है और गर्दिश में चन्दा तारे तुझसे मिलने की राहों को पर मैं तकता ही रहता हूँ क्या आलम था बूंदों सी बरस तू मेरे भीतर समाई थीनदियाँ का पानी हूँ बिन तेरे हरदम तन्हा सा बहता हूँतेरा साथ मिला तो मुझमें ऊँची चट्टानों सी ताकत थी प्रेम का रस सूखा तो अब मैं रेती के टीले सा ढहता हूँचाहे ग़म कितना भी आए मैं बिल्कुल भी मायूस नहींनई खुशी की आशा में मैं बस हरदम जिन्दा रहता हूँ शिशिर मधुकर

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12 Comments

  1. Madhu tiwari 03/03/2017
    • Shishir "Madhukar" 04/03/2017
  2. ANU MAHESHWARI 03/03/2017
    • Shishir "Madhukar" 04/03/2017
  3. Meena Bhardwaj 04/03/2017
    • Shishir "Madhukar" 04/03/2017
  4. Kajalsoni 04/03/2017
    • Shishir "Madhukar" 04/03/2017
  5. डी. के. निवातिया 04/03/2017
    • Shishir "Madhukar" 04/03/2017
  6. babucm 06/03/2017
    • Shishir "Madhukar" 07/03/2017

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