रिश्तों की पौध – शिशिर मधुकर

साफ दिल के साथी से जब नज़रें मिलाओगे वो हँसती हुई खुद की छवि तुम देख पाओगेप्रेम और विश्वास संग जो तुम घर बनाओगेसुख दुःख के हर मौसम में बस मुस्कुराओगेतुम और मैं हम ना हुए तो ये लहरें डुबोएँगी कैसे इस भव सागर के आखिर पार जाओगेप्रीत जो होगी न मन में मेरी हर बात चुभेगीअठखेलियों पर भी फिर तुम तिलमिलाओगेरिश्तों की पौध भी तो शिद्दत से फले मधुकर दोगे अगर ना खाद गुल फिर कैसे खिलाओगे शिशिर मधुकर

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14 Comments

  1. Madhu tiwari 27/02/2017
    • Shishir "Madhukar" 27/02/2017
  2. Kajalsoni 27/02/2017
    • Shishir "Madhukar" 27/02/2017
  3. ANU MAHESHWARI 27/02/2017
    • Shishir "Madhukar" 27/02/2017
  4. डी. के. निवातिया 27/02/2017
    • Shishir "Madhukar" 27/02/2017
  5. babucm 28/02/2017
    • Shishir "Madhukar" 28/02/2017
  6. Meena Bhardwaj 28/02/2017
    • Shishir "Madhukar" 01/03/2017
  7. vijaykr811 01/03/2017
    • Shishir "Madhukar" 01/03/2017

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