खुशियों की तलाश – अनु महेश्वरी

कुछ लोगों से मिलकेयह एहसास होता मन मेंमानो खुशियाँ टटोल रहेतलाश में उसकीइधर से उधर भटक रहेकुछ समझ नहीं पा रहेबस समय बिता रहेअनेकों भावनाएँ दिल मेंआती जाती रहती उन केबहुत कुछ कहना भी चाहतेपर नहीं कह पाते ठीक सेमानो भरोसा उठ गया होआस पास के माहोल सेएक उदासी की चादर ओढ़ेअपने चारो तरफ दीवार बनाज़िन्दगी को कहा से शुरू करेइसी उधेर बुन मेंवो जिए जा रहेबस समय बिता रहेकभी कभी बहुत सारी बातेंएकबार में बोल जातेआवाज ऊंची-नीचीं होतीकभी बस खामोश होअपने आप में जाते खोदिलचस्पी नहीं किसी बात मेंज़िन्दगी बिता रहे भ्रमित सेकुछ तो अस्तव्यस्त सेकुछ खोए खोए सेवो जिए जा रहेबस समय बिता रहेकाश समय रहते समझ जाएखुशियाँ अपनों के बिचघर पे ही मिलेगीजहा उसे छोड़ा थाउनका इंतज़ार कर रहीबाहें फैलाए इसी उम्मीद मेंकब वो लौट आएकब वो लौट आए। अनु महेश्वरीचेन्नई

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12 Comments

  1. डी. के. निवातिया 25/02/2017
    • ANU MAHESHWARI 25/02/2017
  2. Shishir "Madhukar" 25/02/2017
    • ANU MAHESHWARI 25/02/2017
  3. Madhu tiwari 25/02/2017
    • ANU MAHESHWARI 25/02/2017
  4. Kajalsoni 25/02/2017
    • ANU MAHESHWARI 25/02/2017
  5. sumit jain 26/02/2017
    • ANU MAHESHWARI 28/02/2017
  6. babucm 27/02/2017
    • ANU MAHESHWARI 27/02/2017

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