सच क्या होता है—डी के निवातिया

(सच क्या होता है)

हमने जो पूछ लिया सच क्या होता है !तिलमिला के बोले ऐसे न बयां होता है !!

लांघ रहे हो आदो-अदब का दायरा जनाब ! सवाल-जबाब का भी एक हद ह्या होता है !!

पकाना पड़ता है जुर्म की चाशनी में पहले !तपकर सच का रूप सामने आया होता है !!

कुछ खौफ खाओ खुदा के रहमो करम से !जालसाजो पर कोई रहम न दया होता है !!

 

देखना ही चाहते हो सच्चाई की गहराई को बेबस आँखों में झाँक लेना, सच क्या होता है !!!!!

—डी के निवातिया—

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14 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 25/02/2017
    • डी. के. निवातिया 27/02/2017
  2. Madhu tiwari 25/02/2017
    • डी. के. निवातिया 27/02/2017
  3. Kajalsoni 25/02/2017
    • डी. के. निवातिया 27/02/2017
  4. Meena Bhardwaj 25/02/2017
    • डी. के. निवातिया 27/02/2017
  5. ANU MAHESHWARI 25/02/2017
    • डी. के. निवातिया 27/02/2017
  6. sumit jain 26/02/2017
    • डी. के. निवातिया 27/02/2017
  7. babucm 27/02/2017
    • डी. के. निवातिया 27/02/2017

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