बसंत सा प्यार – मनुराज वार्ष्णेय

आज पूछ रहे है ये लोग कि अब हम शायरियाँ नही लिखते है हर पल खुश रहते है ऐसा क्या हुआ जो अब उदास नही दिखते हैउन लोगों को अब मैं क्या बताऊँ कि मेरी चाहत मुझे मिल गयी हैऐसा कभी हुआ है कि बसंत में भी पेड़ों पर पीले पत्ते दिखते है

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6 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 13/02/2017
  2. C.M. Sharma babucm 13/02/2017
  3. Madhu tiwari Madhu tiwari 13/02/2017
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 14/02/2017
  5. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 14/02/2017

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