उल्फत का नशा- शिशिर मधुकर

आप जब दिल से निकालोगे तो चैन आएगा बात ना करने से उल्फत का नशा ना जाएगा ना उमंगे है ना तरंगे हैं ना चेहरे पे कोई हँसी विरह का ताप तो हर पल असर दिखाएगा अलि का दोष नहीं वो फूलों का दीवाना हुआप्यार की खुशबू में आशिक़ तो लिपट जाएगा पथिक तो प्यासा इस सफ़र में फना हो जाता जिसने अमृत पिलाया कहो कैसे उसे भुलायेगा बाग को कितना भी गुलों से तुम सजाओ यहाँआंधी तूफानों में मधुकर वो तो उजड़ जाएगा शिशिर मधुकर

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8 Comments

  1. babucm 13/02/2017
    • Shishir "Madhukar" 13/02/2017
  2. Madhu tiwari 13/02/2017
    • Shishir "Madhukar" 13/02/2017
  3. Meena Bhardwaj 13/02/2017
  4. Shishir "Madhukar" 13/02/2017
  5. डी. के. निवातिया 14/02/2017
    • Shishir "Madhukar" 14/02/2017

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