“कशमकश”

छन्द अलंकारों से सजी कवितामुझे सोलह श्रृंगार युक्त दुल्हनतो कभी बोन्सई की वाटिका समान लगती है ।

कोमलकान्त पदावली और मात्राओं-वर्णों की गणनाउपमेय-उपमान , यति-गति के नियम औरभाषा सौष्ठव सहित छन्दों की संकल्पना ।

कोमल इतनी की छूने सेमुरुझा जाने का भरम पलता हैनर्म नव कलिका सी टूट जाने का डर.लगता है ।

मुझे कविता कानन में बहती बयारतो कभी निर्मल निर्झर समान  लगती. हैनियम में बाँधू तो जटिल आंकड़ों की संरचना जान पड़ती  है ।

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“मीना भारद्वाज”

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14 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 11/02/2017
  2. Meena Bhardwaj 11/02/2017
  3. Madhu tiwari 11/02/2017
    • Meena Bhardwaj 11/02/2017
  4. Meena Bhardwaj 11/02/2017
  5. mani 12/02/2017
  6. Meena Bhardwaj 12/02/2017
  7. babucm 13/02/2017
  8. Meena Bhardwaj 13/02/2017
  9. डी. के. निवातिया 14/02/2017
  10. Meena Bhardwaj 14/02/2017
  11. ALKA 23/03/2017
  12. Meena Bhardwaj 24/03/2017

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