रण भेरी—कुण्डलिया छन्द—डी के निवातिया

कुण्डलिया छन्द एक छोटा सा प्रयास आब सबकी नजर

हाथ जोड़ सब चल पड़े, नेता चारो ओर !किसकी झोली क्या मिले, रात जगे या भोर !!रात जगे या भोर, भाग्य किसके पट खोले !रण भेरी बज उठी, सभी बढ़-चढ़ कर  बोले !!चोर, डाकू, बाबा, मिलकर निकले सब साथ !उस पथ देश जाये, डोर लगे अब जिस हाथ !! 

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(—:: डी के निवातिया ::—)

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16 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 08/02/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 09/02/2017
  2. C.M. Sharma babucm 09/02/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 09/02/2017
      • C.M. Sharma babucm 09/02/2017
        • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 09/02/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 09/02/2017
  3. Madhu tiwari Madhu tiwari 09/02/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 09/02/2017
  4. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 09/02/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 09/02/2017
  5. Kajalsoni 10/02/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 10/02/2017
  6. gursevak singh pawar jakhal guirsevak 20/02/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 20/02/2017

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