ग़ज़ल

नज़र आ रही तू जिधर देखते है |तेरे इश्क का ही असर देखते है ||नहीं है खबर खुद की ही आशिकी में |करे बात मेरी नगर देखते है ||दिखाता नहीं ज़ख़्म मैं हर किसी को |बशर मार पत्थर जिगर देखते है ||जले है जमाना हमें देख कर जो |जरा सा कभी हम निखर देखते है |”मनी” है नहीं अब गिला तुम से कोई |रही जिंदगी का सफ़र देखते है |मनिंदर सिंह “मनी”

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18 Comments

    • mani mani 08/02/2017
  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 08/02/2017
    • mani mani 08/02/2017
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 08/02/2017
    • mani mani 08/02/2017
      • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 08/02/2017
        • mani mani 08/02/2017
          • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 08/02/2017
          • mani mani 08/02/2017
  3. Shabnam Shabnam 08/02/2017
    • mani mani 08/02/2017
  4. C.M. Sharma babucm 09/02/2017
    • mani mani 12/02/2017
  5. Kajalsoni 10/02/2017
    • mani mani 12/02/2017
  6. Madhu tiwari Madhu tiwari 10/02/2017
    • mani mani 12/02/2017

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