गजल-काश मैं ही तेरी मंजिल का किनारा होता,

काश मैं ही तेरी मंजिल का किनारा होता |आज दिल ने मेरे तुझ को न नकारा होता ||पूछता है हर कोई तेरे बारे मुझ से |दर्द का जैसे छपाका इक मारा होता ||था नहीं दिल में कभी मैं सनम तेरे |काश इक बार मुझे दिल से पुकारा होता ||इश्क है आग का दरिया था बताया तूने |काश तूने उस में खुद को उतारा होता ||थी “मनी” की हर चाहत तुझ से ही यारा |कुछ समां उस के लिये तुमने गुजारा होता ||मनिंदर सिंह “मनी”

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11 Comments

  1. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 07/02/2017
    • mani mani 08/02/2017
  2. Madhu tiwari Madhu tiwari 07/02/2017
    • mani mani 08/02/2017
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 08/02/2017
    • mani mani 08/02/2017
  4. C.M. Sharma babucm 08/02/2017
  5. mani mani 08/02/2017
  6. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 08/02/2017
  7. Kajalsoni 10/02/2017

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