दिल निकाल कर

इस इश्क़ की तू इक नई कायम मिसाल करकर बन्द मुझको दिल के तू पिंजरे में डाल कर***है प्यार की कसम सनम तू यूँ तो कर नहींकिस्मत का मेरी फैसला सिक्का उछाल कर***दिल से जुड़ी है बात सुनूंगा मैं दिल से ही गर चाहिए जवाब तो दिल से सवाल कर***फ़रियाद सबकी है खुदा से इतनी सी ही बस उसका तू कर न कर खुदा मेरा खयाल कर***कर कर के याद बात जवानी की ए सनमशरमा के अपने गालों को ऐसे न लाल कर***लिक्खे थे जितने खत तुम्हे डाले न डाक में रक्खें है मेरे पास वो अब भी संभाल कर***बदनाम खुद को करके मेरा नाम हो गया जीता है बाज़ी दिल की रजत दिल निकाल कर ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~गुरचरन मेहता :रजत:

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7 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 06/02/2017
  2. Madhu tiwari 06/02/2017
  3. Kajalsoni 06/02/2017
  4. babucm 07/02/2017
  5. डी. के. निवातिया 07/02/2017
  6. mani 07/02/2017

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