कुदरती रज़ा – शिशिर मधुकर

यादों को जिंदा रखने को मिलते रहो साथी धुंधली तस्वीरों में सूरते नज़र में नहीं आतीजो रूकावटे ना हों बीच में धारा नहीं मचले पथरीली राहें तो मिलनी हैं कैसे कोई बच लेउथल पुथल ना हो तो किस काम का जीवन वीरानों में लगता नहीं है इंसा का कभी मनवक्त का है क्या भरोसा बदल ले अपनी चालगैर बन कैसे कहोगे फिर अपने दिल का हाल बदले जो ना उसूल कहाँ मिलते हैं ऐसे लोगकुदरती रज़ा से बनते है मुहब्बतों के संयोगशिशिर मधुकर

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12 Comments

  1. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 05/02/2017
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 05/02/2017
  3. Kajalsoni 05/02/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 06/02/2017
  4. C.M. Sharma babucm 06/02/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 06/02/2017
  5. Madhu tiwari Madhu tiwari 06/02/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 06/02/2017
  6. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 06/02/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 06/02/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 08/02/2017

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