प्रीत का रंग – शिशिर मधुकर

हाथ छूटे हैं जीवन में मगर बंधन तो नहीं टूटे दूरीयां चाहे हों जैसी ना तुम रूठे ना हम रूठे समय का फेर है सारा इसका क्या करे कोईऋतु जब आएगी खिल जाएँगे पत्ते नए बूटे ज़माने की बातों का असर हो जाता है अक्सर मुहब्बत में नहीं करता वरना वादे कोई झूठेये मालिक की मर्जी थी जो तुम पास में आए बिना कारण दिलों में प्रीत के अंकुर नहीं फूटेबदल सकती है हर ईक चीज़ मौसम बदलने से प्रीत का रंग ये गहरा पर मधुकर ना कभी छूटेशिशिर मधुकर

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16 Comments

  1. babucm 31/01/2017
    • Shishir "Madhukar" 31/01/2017
  2. Shabnam 31/01/2017
    • Shishir "Madhukar" 31/01/2017
  3. Meena Bhardwaj 31/01/2017
    • Shishir "Madhukar" 31/01/2017
  4. ANU MAHESHWARI 31/01/2017
    • Shishir "Madhukar" 31/01/2017
  5. mani 01/02/2017
    • Shishir "Madhukar" 01/02/2017
  6. Madhu tiwari 01/02/2017
    • Shishir "Madhukar" 02/02/2017
    • Shishir "Madhukar" 03/02/2017
  7. Kajalsoni 03/02/2017
    • Shishir "Madhukar" 04/02/2017

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