मैं हिन्दू. तू मुस्लिम….. मनिंदर सिंह “मनी”

मैं हिन्दू. तू मुस्लिम,मैं सिख, तू ईसाई,कहीं तूने , कहीं मैंने,धर्म की दीवार सजायी,,अपने ही मद में हमने,इंसानियत भुलायी,,मैं हिन्दू. तू मुस्लिम,मैं सिख, तू ईसाई,कभी तूने, कभी मैंने,आशियाने एक दूजे के जला दिए,,बिना कुछ सोचे समझे,चिराग अपने ही घरो के बुझा दिए,,मैं हिन्दू. तू मुस्लिम,मैं सिख, तू ईसाई,हर दिल की जमी पर,नफरतो के बीज हमने बो लिए,,मिलकर साथ चलने के सपने, हमने हर आंख से खो लिए,,मैं हिन्दू. तू मुस्लिम,मैं सिख, तू ईसाई,धर्म को आड़ में लेकर,कहीं अस्मत से खेला हमने,,निकाली है रंजिशे,कभी एक दूसरे से हमने,,मैं हिन्दू. तू मुस्लिम,मैं सिख, तू ईसाई,बनने आये थे इंसान,क्या बन गए?,,पढ़ी नहीं गीता, कुरान,पर उसके नाम से हम लड़ गए,,मैं हिन्दू. तू मुस्लिम,मैं सिख, तू ईसाई,मनिंदर सिंह “मनी”नोट:- मुझे गीत लिखना सीखना है आप सभी गुणीजनों से निवेदन है की अपने कीमती समय से कुछ समय निकाल कर मुझे गीत लिखने के बारे में अपने कीमती सुझाव दे ताकि में अपने गीतों को लय में लिख सकूँ….धन्यवाद सहित……

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7 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 29/01/2017
  2. babucm 29/01/2017
  3. निवातियाँ डी. के. 30/01/2017
  4. Meena Bhardwaj 30/01/2017
  5. ANU MAHESHWARI 31/01/2017
  6. Madhu tiwari 03/02/2017

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