हमारा भारत——ऋतुराज

तुंग शिखर पर दिव्य-आलोकित, भारत -भाल चमकता हैजलधि जिसके चरण पखारे,वह विश्व-गुरू प्रणेता हैजहां आंखों में ममता बसती है बांहो में कुटुंब समाता हैसंगीत जहां है रोम-रोम में भगवान भी बांसुरीवाला हैजहां जन्नत मां की चरणों में जहां पिता वृक्ष की छाया हैत्योहार जहां है रंगो से जहां दीपों से तमस् भी हारा हैजहां राम की पूजा होती है और अली भी दिल में होते हैंजहां गाथा है रणवीरों की, महाराणा और बलवीरों कीजहां सुबह स्वर्णिम होती है और शाम सिंदुरी आभा हैजहां हवा बसंती होती है जहां पंछी गाना गाते हैंमाटी की सोंधी खुशबू है जहां गाँवो के गीत सुहाते हैंजहां शिव ही सुंदर होते हैं जहां शिवा ही शक्ति होती है जहां माता की भक्ति से भी पहले देश की भक्ति होती हैजहां विषधर भी गलहार बना है, जटा में गंगा थामा हैजहां चंद्र विराजे शिखर पर जिसके ऐसा भारत हमारा है।##ऋतुराज

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  1. babucm 27/01/2017

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