अनमोल है बेटियां…-पियुष राज

अनमोल है बेटियांअगर बेटे हीरा है तोहीरे की खान है बेटियांअपने घर-गांव-देश कीपहचान है बेटियांअगर बेटे सूरज है तोगंगा की अविरल धारा है बेटियांअगर बेटे आसमान है तोउस आसमान में चमकतासितारा है बेटियांउनसे ही तो हैहमारी हर ख़ुशीवे नही देख सकतीहमे कभी दुखीजब माँ ना हो घर परतो उनकी सारी जिम्मेदारीउठाती है बेटियांबेटे तो कह देते हैहोटल में खा लेना पापापर अपने पिता-भाई के लिएगरम-गरम खाना बनाती है बेटियांअपने प्यारी बिटिया के मत काटो पंखउसमे भी होती है जानउसे भी आगे बढ़ने दोऔर बनाने दो अपनी अलग पहचानअपने माँ-बाप का घर छोड़करदूसरे का घर बसाती है बेटियांदो घरों को जोड़करअपना फ़र्ज़ निभाती है बेटियांखुद सारे दुःख सहकर भीमुस्कुराती है बेटियांअगर ना समझो बेटी की कीमततो उनसे जाकर पूछोजिनके घर नही होती है बेटियां….पियुष राज,दुधानी,दुमका,झारखण्ड ।उम्र-17 साल(Poem.No-42) 22/01/2017Mob-9771692835

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4 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 24/01/2017
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 24/01/2017
  3. पियुष राज Piyush Raj 24/01/2017
  4. C.M. Sharma babucm 25/01/2017

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