जिंदगी और मौत

मौत और जिंदगी दोनो ही मेरे साथ खड़े हैकिस राह पर मै जाऊ ,जिसे समझा था अपनाआज वो ही मुझे तनहा करके चला गयाइस हसीं सफ़र को लिखा मेने,पर लेखक वो बनकर चलाधुप छाव मुकदर है मेरा और मौत के आगोश मै सोना अंत है मेराबेक़सूर हु मै फिर भी बेवफा कहता गया वो मुझेराहे मेरी निगहै मेरी  उसके दीदार को तरसती हैपर सारा विशवास तोड़ कर वो छोड़ गया मुझेउसपे किया इतना भरोसा क्यों मैंनेयह मेरा दिल ही जनता है क्यूंकि दिमाग तो उसे नहीं मानता हैहर पल यूह रूठना मनानाहर वकत दिल के टुकड़े हो जानासब कॉच की भांति बिखेर कर मुझे चला वोआज इश्क ने इतना दिया मुझे ग़मइस तनहाई के आलम में मेरी आखै हों गयी नमआखिर समझा क्या था मुझे उसने?जब चाहे बेइम्तिया मोहब्बत की औरजब चाहे उठा के फेक दिया मुझेजब खून के रिश्ते के बाद ,किसी पर विश्वास किया मेनेसब करीब आकर जहन मै जखम देकर चले गए मुझे।

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5 Comments

  1. babucm 27/01/2017
  2. Madhu tiwari 28/01/2017
    • Shabnam 28/01/2017
  3. Shishir "Madhukar" 29/01/2017
    • Shabnam 29/01/2017

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