“गुजारिश”

गेसुओं में फिरती अंगुलियों की गर्माहट ,
दबे सुर में लोरी की गुनगुनाहट ।
आँखों में जलन सी भरी है ,
एक अंजुरी भर नींद की भेजो ना ।।
भूली-बिसरी यादों की  ,
अनदेखे ख्वाबों की गाँठ लगी गठरी ।
घर के किसी कोने में ,
बेतरतीबी से रखी है ।।
एक गुजारिश है तुमसे  ,
मेरे अहसासों को नेह भरी पाती संग ।
मेरे अनमोल थाती समझ ,
मुझ तक भेजो ना ।।
XXXXX
“मीना भारद्वाज”

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12 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 18/01/2017
  2. Meena Bhardwaj 18/01/2017
  3. babucm 19/01/2017
  4. babucm 19/01/2017
  5. babucm 19/01/2017
  6. Meena Bhardwaj 19/01/2017
    • Meena Bhardwaj 19/01/2017
  7. निवातियाँ डी. के. 19/01/2017
    • Meena Bhardwaj 19/01/2017
  8. ALKA 24/03/2017
  9. Meena Bhardwaj 24/03/2017

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