थैंक्यू जिंदगी !

में रहा में चलता चला जा रहा थाकुछ दूर ही चल पाया थादेखा एक सुन्दर महिला कोदिल में अरमान मेरे जगे ही थेदुआ की ईश्वर से,उससे मिलने कीमें पहुचा ही था उसके पासवो महिला उठ खड़ी हुई, बेसाकी के सहारेमुझे देखा मुस्कुराई, फिर चलदी रहा मेंमें स्तब्ध सोचता रहा कुछ समयउसकी लाचारी को देख, मुस्कुराना भी भूल गयाहे ईश्वर में उसके जैसा नहीं हुमेने अपने को देख, थैंक्यू किया जिंदगी कोइसी कश्मकश मेंबढ़ा रहा था रेलवे स्टेशन की औरदिखाई दिया एक लड़कापूछताछ काउंटर परव हटा कटा नोजवान थाउसके दिल में उतसाह थादे रहा था रेल की जानकारीमेने भी ली जानकारीतभी वो उठ खड़ा हुआछड़ी के सहारे, वो तो नेत्रहिन् थाइस अवस्ता को देख, में समझ नहीं पायामुह में उंगली दबाकर चला आयामेरी अपनी दोनों आखो को देखथैंक्यू किया जिंदगी कोइन घटनाओ को देखमन में कई सवाल है किन्तु जवाब नहीं हैहलचल मच गई मेरे जीवन मेंकेसी विचित्र विडंबना हैकिसको दोष दूभाग्य को या फिर कर्मो कोये सवाल उनके जहन में भी होगाफिर भी जिए जा रहे है उतसाह सेसल नहीं है माथे की लकीरों परजोश है उनके दिलो मेंहौसला है कुछ कर गुजर ने कापरिचय दिए है आत्मबल काप्रेरणा लेनी है उनके जीवन सेकभी कमजोर नहीं पड़ना हैडटकर सामना करना है बुराइयो सेफतह हासिल करनी हैजिंदगी के हर मोर्चे परखुशकिस्मत हु में भी बहुतहे ईश्वर मुझे क्षमा करनाथैंक्यू किया जिंदगी को

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6 Comments

  1. babucm 10/01/2017
    • sumit jain 10/01/2017
  2. mani 10/01/2017
  3. Madhu tiwari 10/01/2017
  4. sumit jain 10/01/2017
  5. निवातियाँ डी. के. 11/01/2017

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