खुशियो की भूलभुलैया

तलाश है इस जीव कोमुकम्मल ख़ुशी पाने कीन जाने कबसे भटक रहा हैकभी उल्टा गर्भ मे कभी चौरसी भटकेकभी इस दर पे कभी उस दरकभी इस डगर पे कभी उस डगरकभी इस गली तो कभी उस गली मेंकभी इधर से और कभी उधर सेकभी मोह रूपी भवर में फस ता जारहा हैभटक गया है इस संसार मेंसरक आई है उसकी तलाश,मौलिक दुनिया से मायावी दुनिया मेंमायावी दुनिया(सोशल मीडिया) के अवतार नेमानो खलबली मचादी है संसार मेंजीवन का है अभिन्न अंगरूबरू होते है रोज उससेयही तो है मायावी दुनियान समझो उसे सिर्फ समाचार पत्रन समझो उसे रेडियो या न्यूज चैनलये तो माध्यम हैसंचार का, अभिव्यक्ति काविचारो का, जान-पहचान काकमैंट्स का ,शेयरिंग कातरह तरह के रिश्तो काजोड़ दिया है हम को एक दूसरे सेलगता है अकेले नहीं है दुनिया मेंलगता है खुशियां है चारोओरये तो चकाचौंध है मायावी दुनिया काये एहसास है खट्टे मिठे पलो काये खुशिया है कुछ समय कीये दूर कर रही है अपनों को अपनों सेधर्म से, संस्कार से, ईश्वर सेअजीब विडंबना हैहम बन नहीं पाए पारिवारिकपर होड़ है सोशल बनने कीये तो भूलभुलैया है खुशियो की

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5 Comments

  1. Madhu tiwari 08/01/2017
  2. कृष्ण सैनी 09/01/2017
  3. babucm 09/01/2017
  4. sumit jain 09/01/2017
  5. निवातियाँ डी. के. 09/01/2017

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