“बाढ़”

सुना कहीं से , शहर में कल रातअचानक बाढ़ आ गईप्राकृतिक आपदा हैकभी भी , कहीं भीबिना चेतावनी के, आ जाती हैदुख की बात हैआती है तो विनाश औरभयावहता की लकीरें भी छोड़ जाती हैदुखी हम हैं तो बचाव के रास्ते भीहमें ही तलाशने होंगेईंट-पत्थरों के नहींसंस्कारों के भवन बनाने होंगेसजग हौंसलों और दृढ़ संकल्प कीदरकार होगीआरोपों-प्रत्यारोपों से नहीमानवीय गुणों से जिन्दगियाँआबाद  होंगी .

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“मीना भारद्वाज”

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16 Comments

  1. mani 04/01/2017
    • Meena Bhardwaj 04/01/2017
  2. Madhu tiwari 04/01/2017
    • Meena Bhardwaj 04/01/2017
  3. Shishir "Madhukar" 04/01/2017
    • Meena Bhardwaj 04/01/2017
  4. ANU MAHESHWARI 04/01/2017
  5. Meena Bhardwaj 05/01/2017
  6. babucm 05/01/2017
  7. Meena Bhardwaj 05/01/2017
  8. निवातियाँ डी. के. 05/01/2017
  9. Meena Bhardwaj 05/01/2017
  10. Meena Bhardwaj 09/01/2017
  11. ALKA 24/03/2017
  12. Meena Bhardwaj 24/03/2017

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