जिन्ह प्रेम कियो तिन्ह ही प्रभ पायो….सी. एम्. शर्मा (बब्बू)..

मैं पागल हो भया पढ़ पढ़ सारी रात….फिर उसपे लिखता रहा ज्यूं हुई प्रभात…पढ़-पढ़ लिख-लिख के ज्ञान भयो बहुतेरो…व्यर्थ भयो सब ही जो ना समझा प्रेम की बात..राधा कृष्ण के प्रेम पे लिख डाले गीत पचास….विरह – रास को लेके लिख दी अपनी भड़ास…पर थोड़ा सा भी होता पवित्र प्रेम आभास….निश्चय ही हो जाता दिल में राधा मोहन का वास….राधा मोहन के प्रेम को मैं ना समझा काहे…नासमझ तो समझ गया मैं उद्धव बन पछताए…सृष्टि के जो भेद हैं वो सब इसमें हैं समाये….जिसकी जैसी चाह उसके मन वैसा ही सब भाये….\/सी. एम्. शर्मा (बब्बू)

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14 Comments

    • babucm 04/01/2017
  1. ANU MAHESHWARI 03/01/2017
    • babucm 04/01/2017
  2. Madhu tiwari 03/01/2017
    • babucm 04/01/2017
  3. निवातियाँ डी. के. 03/01/2017
    • babucm 04/01/2017
  4. Shishir "Madhukar" 04/01/2017
    • babucm 04/01/2017
  5. Meena Bhardwaj 04/01/2017
    • babucm 05/01/2017
  6. mani 04/01/2017
    • babucm 05/01/2017

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